pratilipi-logo પ્રતિલિપિ
ગુજરાતી

अपनी ठकुरानी “ श्री राधिका रानी ”

12
5

नाम महाधन है अपनों, नहीं दूसरी कोई सम्पति कमानी, छोड़ अटारी अटा जग के, हमको को कुटिया ब्रज मै है बनानी... टूक मिले रसिको के सदा, और पीबन को यमुना जल पानी, हमें औरन की परवाह नहीं , अपनी ठकुरानी ...