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ગુજરાતી

माँ

4.1
659

कलेजा माँ का मैं निकालकर जब चला था मातृत्व का सूरज तब भी तो नहीं ढला था मेरे हर सपनोका तेरी आँखोंमें पनाह मिली मगर मैंने हरपल तेरी ममता को छला था सभी माँ सहती है दुख ऐसा माना था मैंनेभी खिलौना ला ...

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ટિપ્પણીઓ
  • author
    આપનું રેટિંગ

  • કુલ ટિપ્પણી
  • author
    Abhishek Rai
    26 अप्रैल 2020
    माँ के लिए क्या लिखूं माँ ने तो खुद मुझे लिखा है
  • author
    renu kapoor very innovative
    23 अगस्त 2022
    maa , jaisa koi nahi , bhaaut sunder
  • author
    Manjit Singh
    09 अप्रैल 2021
    marvellous, wonderful
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    Abhishek Rai
    26 अप्रैल 2020
    माँ के लिए क्या लिखूं माँ ने तो खुद मुझे लिखा है
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    23 अगस्त 2022
    maa , jaisa koi nahi , bhaaut sunder
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    Manjit Singh
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